चलो गाँव चले – Let’s Move to Village… #aros


चलो मिल के किसी गाँव चलते है,

इन उँची मंज़िलोसे दूर, इन शहरोंसे दूर,

 

जहा आसमान को देखने,

कही बाहर जाना ना पड़े,

जहा पेडोंसे लिपटने के लिए,

किसी जंगल जाना ना पड़े.

 

चलो मिल के किसी गाँव चलते है,

इन बनावटी हँसी से दूर, इस झूठ से दूर,

 

जहा देखके हँसने पर,

हँसी ही वापस मिलती हो,

जहा पड़ोसी का त्योहारभी,

अपनासा लगता हो.

 

चलो मिल के किसी गाँव चलते है,

इस प्रदूषण से दूर, इस धुएँके बादलोंसे दूर,

 

जहा खुली और शुद्ध हवा,

मुफ़्त में लेने को मिलती हो,

जहा पांच्छियॉंका का घोसला,

सदा हरा भरा रहता हो.

 

चलो मिल के किसी गाँव चलते है,

इस भीड़ से दूर, इस कृत्रिमता से दूर,

 

जहा हरियाली और छाँव मे,

घुमते हुए घंटो बीत जाए,

जिस मिट्टी से हम पैदा हुए,

उस मिट्टी की खुशबू लेने आए.

 

 

6 thoughts on “चलो गाँव चले – Let’s Move to Village… #aros

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