अंधानुकरण – Following Blindly…


हमने सिर्फ़ मंदिर बाँधना सीखा है,
संतोंका, महंतोंका और भगवान का,
लेकिन उनकी मानवताके प्रती सीख,
आज भी उन मंदिरोंमे नही मिलती है.
               ***
हमने आज भी पूजा पाठ चालू रखा है,
अंधोंकी तरह रीति रिवाज़ चलाते है,
लेकिन उन रिवाजोंका मानवता प्रती मतलब,
आज भी गुम है किसी अंधेर कोने मे.
                ***
हम त्योहार तो मनाते है बड़े धूम धामसे,
दीवाली, दशहरा, ईद, और भी कई सारे,
लेकिन आवाम को एक करने की शक्ति,
खो बैठे है इस “मतलब” की चार दीवारोंमे.

3 thoughts on “अंधानुकरण – Following Blindly…

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