Safar #Shair


पानी सफ़र करता है,

हवा सफ़र करती है,

मंजिल सफ़र करती है, राहें सफ़र करते है.
* * *

तोह फिर क्यूँ तनहाईयाँ,

और ये बेचैनीयाँ,

कुछ पाने की आस,

और ना मिलने का ग़म, दिलों में घर करते है?
* * *

सब कुछ तो मिला है,

और क्या पाना है?

कितने दिन ऐसेही,

मोह माया के पीछे, बेवजह झुलसना है?
* * *

जितना मिला उतने में,

जितना पाया उतने में,

अब मशरूफ रहना है,

ज़िन्दगी का मज़ा लेना है, बस सफ़र करते रहना है.
— प्रसाद.

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