इंतेज़ार…


एक दिन वो मुस्कुराकर कह दिए,
काफी दिनों से बात नहीं हुई,
हम भी हँसकर बोलें हाँ,
कभी आँखें चार ही नहीं हुई.
     * * *
वो बोली अब रोज़ करेंगे बातें,
बर्बाद लम्होंको भर निकालेंगे,
हम में थोड़ी उमंग भर आई,
सोचा अब वक़्त अच्छे से गुज़ारेंगे.
     * * *
बातों की जगह बातें रह गयी,
यादें आते आते थम सी गयी,
कब आएगा उनका संदेसा,
सांसें इंतेज़ार करती रह गई.
     * * *
                         — @pbkulkarni

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