दांवत-ए-इश्क़…


दांवत-ए-इश्क़ फरमाइए जरा,

बडी जोरो की भूख लगी है,
जल्दी से प्यार परोसिये जरा,
सदियोंसे उसकी प्यास लगी है.
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कुछ नमकीन, कुछ तीखा,
और कुछ मीठा हो जाए जरा,
पाचक छांस, नशीली नज़र,
और झप्पी भी हो जाए जरा.
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दांवत के बाद एक लंबी सैर,
हाथोंमें हाथ, न ढलता पहर,
खाने के लिए जीना, जीने के लिए खाना,
और साथ में प्यार, कुछ ऐसा हो सफर.
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— @pbkulkarni

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