हमजोली… #Poem


मैं जो गुनगुनाता हूँ गीत,
क्यूँ ना जाने मेरा ये मीत,
मेरे धङकनोंकी बोली,
क्यूँ न जाने हमजोली
* * *
मेरे सुरोंका ये तराना,
और ये आंसूओंका बहाना,
भरी भावनाओंकी झोली,
क्यूँ न जाने हमजोली
* * *
नजर जब ये मिली थी,
बातें तभी से बनी थी,
नजरोंकी ये आँख-मिचौली,
क्यूँ न जाने हमजोली
* * *
अब जो दूरियाँ बढ़ी है,
अब जो दरारें पड़ी है,
फिर क्यूँ सताती सूरत ये भोली,
क्यूँ न जाने हमजोली

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