कल का सूरज…

सब्र करेंगे  रातभर, ये अंधेरा ढलनेका,
कल का सूरज क्या लाएगा, किसे है पता?
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क्या होगी धूप कल, या छाँव में दिन गुजरेगा,
कल का दिन क्या दिखायेगा, किसे है पता?
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रास्ता होगा ख़त्म, या चलती जाएँगी राहें,
राही बननेका दर्द है या ख़ुशी, किसे है पता?
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सब्र करेंगे दिनभर, फिर सूरज ढलनेका,
ये रातें क्या ख्वाब लाएगी, किसे है पता?
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सुहाने होंगे सपने, या फिरसे दूरियां दिखेगी,
किस कश्मकश से गुजरेंगे, किसे है पता?
* * *
चाहतें होगी पूरी, या तक़दीर फिर से नचाएगी,
ज़िंदगी क्या क्या दिखाएगी, किसे है पता?
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— @pbkulkarni

So Surreal…

It was pitch dark outside when suddenly a light flashed up above in the sky. I gazed that way to see “God of Death” descent on the earth. I was happy thinking now the Good will win over Bad and bad things will be eradicated. He will kill the darkness and light will prevail. But alas, it was surreal, a dream. Bad still remained on the earth and good is being over-powered.

 

 

Prompted by words from 3WW