ये पल…

ना आनेवाला, ना जानेवाला,
ये पल है यहां ठहरनेवाला
* * *
लम्हें कुछ खामोश है,
कुछ पल मदहोश है,
दिल थोड़ा सेहमासा है,
चाहतोंमें बिखरा सा है,
नया दिन हो उजालेवाला,
ये पल है यहां ठहरनेवाला
* * *
तस्वीर से तुम्हारी बातें हुई,
धड़कनें यूँ बेताब हुई,
उमंगें फिर से जवां हुई,
फिर सच्चाईसे मुलाक़ात हुई,
ये मंज़र यूँ ही है भटकनेवाला,
ये पल है यहां ठहरनेवाला
* * *
कभी दूर ढकेलता हूँ,
फिर पास बुलाता हूँ,
अंदर ही अंदर झुलसता हूँ,
फिर भी तुम्हें पास रखता हूँ,
ये बंधन ना है टूटनेवाला,
मैं हूँ यहां ठहरनेवाला
* * *
— @pbkulkarni

इंतेज़ार…

एक दिन वो मुस्कुराकर कह दिए,
काफी दिनों से बात नहीं हुई,
हम भी हँसकर बोलें हाँ,
कभी आँखें चार ही नहीं हुई.
     * * *
वो बोली अब रोज़ करेंगे बातें,
बर्बाद लम्होंको भर निकालेंगे,
हम में थोड़ी उमंग भर आई,
सोचा अब वक़्त अच्छे से गुज़ारेंगे.
     * * *
बातों की जगह बातें रह गयी,
यादें आते आते थम सी गयी,
कब आएगा उनका संदेसा,
सांसें इंतेज़ार करती रह गई.
     * * *
                         — @pbkulkarni

The Wait…

He waited by the bank,

for a boat to pass by,

the silence followed,

and the blankness showered.

Some planks swam by,

bumping in the stones,

dipping and coming out,

playing a helpless bout.

The restlessness grew,

when he heard the noises,

but nothing came by and he,

started finding the calm again.

Monsoon came and went,

the water touched the ground,

and slimmed to the centre,

the wait on the bank continued.